Ramzan kyu manate hai?
किसी भी मुस्लिम समुदाय के लोग से पूछे तो आपको ज़रूर बता सकता है की आखिर रमजान होता क्या है | हाँ गैर मुस्लिम सुमदाय के लोगों से शायद उतनी अच्छी जानकारी आपको रमजान के बारे में ना मिल सके | आप मुस्लिम समुदाय के हो या गैर मुस्लिम समुदाय के ऐसे में आप को रमजान के बारे में जानने की इच्छा ज़रूर होती होंगी | मै एक नोट के जरिये आपको रमजान के बारे में सारी जानकारी देने की पूरी कोशिश करूँगा |
इस्लामिक कैलेडर के अनुसार नौवें महीने को रमजान का महिना मानते हैं ये महिना 29 या 30 दिन का हो सकता है | रमजान का महिना इस्लाम धर्म में पाक महिना माना जाता है | इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना “अल्लाह से इबादत” का महीना होता है! मुस्लिम समुदाई इस महीने को परम पवित्र मानते हैं |
Ramzan kyu manate hai
रमजान एक अरबिक शब्द है यह शब्द अरब से निकला है जिसका अर्थ होता है "चिलचिलाती गर्मी तथा सूखापन" मुस्लिम समुदाई में ये मान्यता है रमजान के अवसर पर दिल से अल्लाह की बंदगी करने वाले हर शख्स की ख्वाहिशें पूरी होती है | रमजान के महीने पर पुरे महीने मुस्लिम समुदाए के लोगों द्वारा रोज़े रखे जाते हैं रोज़े रखने का अर्थ वास्तव में "सच्चे दिल से ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना होता है|"
Ramzan kyu manate hai | रमजान क्यों मनाते हैं ?
इस्लामिक धर्म के मान्यताओं के अनुसार रमजान का महिना ख़ुद पे नियंत्रण एवम् संयम रखना सिखाती है अत: रोज़े रखने का मुख्य कारण है "गरीबों के दुःख दर्द को समझना" इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार रोज़े रख कर दुनियाँ में रह रहे गरीबों के दुःख दर्द को महसूस किया जाता है |
रोज़े के दौरान संयम एवम् नियंतरण का तात्यपर है अपने आँख, कान, नाक, जुबान को नियंतरण में रखना | क्योंकी रोज़े के दौरान ना बुरा बोलना, ना बुरा सुनना, ना बुरा देखना और ना बुरा एहसास किया जाता है | इस तरह रमजान के रोज़े मुस्लिम समुदाय को अपने धार्मिक श्रधा के साथ साथ बुरी आदतों को छोड़ना एवम् संयम रखना सिखाती है| इसके साथ ही ये भी मान्यता है की गर्मी में रोजेदारों के पाप धुप की अग्नि में जल जाते हैं सारे बुरे विचार मन से दूर हो जातें है और मन पवीत्र हो जाता है |
रमजान का इतिहास
इस्लामिक धर्म के मान्यताओं के अनुसार सन 610 में जब मुहम्मद साहब को इस्लाम की पवित्र किताब कुरान सरीफ़ का ज्ञान हुआ तब से ही रमजान के महीने को इस्लाम धर्म में पवित्र महीने के रूप में मनाया जाने लगा |
इस्लाम में इस महीने को पवित्र मानाने का एक वजह और भी है कुरान के अनुसार इसी महीने पैग़म्बर साहब को अल्लाह ने अपने दूत के रूप में चुना था | अत: ये महिना मुस्लिम समुदाय के हर व्यक्ति के लिए खाश एवम् पवित्र है और एक महीने सबको रोजा रखना अनिवार्य माना गया है |
Ramzan kyu manate hai
रमजान की सच्चाई
इसके अलावा समाज में रमजान के पवित्र महीने में रोजा रखने के बारे में कुछ भ्रामक धारणायें फ़ैली है आइए ये धारणयें कितनी सच्ची है ये भी जान लेते हैं |
कहा जाता है रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाए के हर लोगों को रोजा रखना अनिवार्य है, परन्तु यदि कोई बीमार है या कोई मुस्लिम महिला गर्भवती है, या अन्य किसी वजह से रोजा नहीं रखना चाहते तो ये उनकी व्यक्तिगत इच्छा है वो रोजा रखे या ना रखे क्योंकी कुरान में कहीं ऐसा नहीं कहा गया है |
समाज में कई लोगों को ऐसा भी लगता है की रोज़े के दौरान थूक भीं नहीं निगलना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है, लोगो को ऐसा इसलिए लगता है क्योंकी रोज़े के दौरान पानी पिने की भी मनाही होती है |
ऐसा कहा जाता है की रोजेदार के सामने भोजन नहीं करना चाहिए लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है क्योंकी जिसने रोजा रखा है उसमे इतनी सहन शक्ति होती है की भोजन देखने के बाद भी उसे खाने की इच्छा नहीं होती |
इसके अलावा रोज़े रखने वाले व्यक्ति द्वारा अगर गलती से कुछ सेवन कर लिया जाता है तो उसका रोजा नहीं टूटता क्योंकी ऐसा जानबूझ कर नहीं किया गया है |
रमजान कैसे मनाया जाता है
रमजान के महीने में जिसने भी रोजा रखा है उसके द्वारा दिन भर में कोई भी भोजन या जलपान ग्रहण नहीं किया जाता है यंहां तक की पानी भीं नहीं पिया जाता और ना ही कोई बुरी आदतें जैसे सिगरेट, गुटखा, तम्बाकू इत्यादि |
रोजेदार द्वारा सूर्य उगने से पहले थोड़ा भोजन किया जाता है जिसे सेहरी कहा जाता है, जबकि दिन भर रोजा रखने के बाद साम को जो खाना खाया जाता है उसे इफ्तार कहा जाता है |
रमजान के महीने में रोजेदार रोजा खजूर खा कर तोड़ते हैं क्योंकी मान्यताएँ ये है की अल्लाह के दूत तो रोजा खजूर खा के तोड़ने को कहा गया था तब से आज तक रोजा खजूर खा कर ही तोरा जाता है |
इसके अलावा खजूर खाना सेहत के लिए भी लाभकारी होता है, खजूर पेट की दिक्कत, लीवर एवम् अन्य कमजोरियों को ठीक करने में भी फ़ायदे मंद होता है |
रमजान का यह महिना ईद-उल-फितर से समाप्त होता है जिसे मीठी ईद भी कहते है, यह दिन मुस्लिम समुदाए के लिए बड़े ही हर्षोल्लास का दिन होता है, ईद को मुस्लिम समुदाए का सबसे बड़ा पर्व मना गया है |
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रमजान का महत्व
मुस्लिम समुदाए के प्रत्येक व्यक्ति के लिए रमजान का महिना पवित्र माना गया है
रमजान के इस मिहिने में मुस्लिम समुदाए के द्वारा पुरे महीने रोजा रखा जाता है और मान्यत यह है की रोजा रखने से सारे गुनाहों की माफ़ी दी जाती है |
मान्यता है की रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुले रहते हैं, अत: अल्लाह के प्रति श्रधा रखने वाले इस पुरे महीने रोजा रखते हैं और इसके अंतिम दिन ईद मानते हैं |
मुझे पूरी उम्मीद है की आपको मेरी यह "लेख रमजान क्यों मानते है" ज़रूर पसंद आई होगी |
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